"महनीयराष्ट्रभक्तस्य नेताजीसुभाषवर्यस्य कतिपयामृतवचनानां संस्कृतानुवाद:"

"महनीयराष्ट्रभक्तस्य नेताजीसुभाषवर्यस्य कतिपयामृतवचनानां संस्कृतानुवाद:"

१.देहि रक्तं त्वम्मे,स्वातन्त्र्यमहं ते दास्यामि।

तुम  मुझे  खून  दो  मैं  तुम्हें  आज़ादी  दूंगा!

२.राष्ट्रवाद: मानवजाते: उच्चतमादर्शै:  "सत्यं शिवं सुन्दरम् "इत्येभि: प्रेरितोऽस्ति।

राष्ट्रवाद मानव जाति  के  उच्चतम आदर्शों  सत्यम्  , शिवम्, सुन्दरम्  से   प्रेरित  है।

३.संस्मर!सर्वबृहदपराध: अन्यायसहनम् दोषान्वितेन समं सन्धिकरणञ्च।

याद  रखिए  सबसे  बड़ा  अपराध अन्याय सहना और  गलत  के  साथ  समझौता  करना है।

४.इतिहासे कदापि विचारविमर्शाभ्यां किमपि वास्तविकं परिवर्तनं न जातम्।यावत् क्रियापरणितिर्न भवति।

इतिहास  में  कभी  भी विचार-विमर्श  से  कोई  वास्तविक  परिवर्तन   हासिल  नहीं हुआ है।

५.एकस्य सैनिकस्य रूपे भवद्भि: त्रय आदर्शा: संस्थापनीया: तदाधारीकृत्य च  जीवितव्यम् -सत्यता  कर्त्तव्यं बलिदानञ्च।यो भट: सर्वदा स्वदेशं प्रति निष्ठावान् /कर्त्तव्यपालको वा भवति,यश्च सर्वदा स्वजीवनस्य बलिदानं कर्तुं सिद्धो भवति,स: अजेयोऽस्ति।यदि त्वमपि अजेयो भवितुम् ईहसे तर्हि  त्वया एते आदर्शा: स्वहृदये संस्थापनीया:।

एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोना और उन पर जीना होगा - सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान। जो सिपाही हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है, वो अजेय है। अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने ह्रदय में समाहित कर लो।

६.एकस्य सद्भटस्य कृते सैन्याआध्यात्मिकयोर्द्वयोरेव प्रशिक्षणयोरावश्यकता भवति।

एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की ज़रुरत होती है।

७.प्रान्तीययो: ईर्ष्याद्वेषयो: दूर्वारणाय यावत्सहाय्यं हिन्दीप्रचारेण प्राप्स्यते, नान्यस्मात् कस्मादपि।

प्रांतीय ईर्ष्या-द्वेष दूर करने में जितनी सहायता हिन्दी प्रचार से मिलेगी, दूसरी किसी चीज से नहीं।

८.अद्य अस्माकमन्तरङ्गेषु केवलम् एकैव इच्छा भवेत् मुमूर्षा।येन भारतं जीवितुं शक्नुयात्।एकस्य हुतात्मनो मुमूर्षा।यतोहि स्वतन्त्रताया मार्गो हुतात्मनां रक्तेन प्रशस्तो भवेदिति।

आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके ।
#महनीयो_नायकः_नेताजी_सुभाषः
#संस्कृतभारती
#स्वच्छभाषाभियानम्
#सुरभारतीसमुपासका:
#दीपकवात्स्य:

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